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रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास: खारुन नदी किनारे मिले 2000 साल पुराने कुषाणकालीन सिक्के और बर्तन

रायपुर: रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास: खारुन नदी किनारे मिले 2000 साल पुराने कुषाणकालीन सिक्के और बर्तन, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब अपना पुरातात्विक इतिहास लिखने को तैयार है। खारुन नदी के किनारे महादेव घाट के पास पुरातत्व विभाग को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहाँ सर्वे के दौरान कुषाण काल (प्रथम से तृतीय शताब्दी) के 60 तांबे के सिक्के और प्राचीन मिट्टी के बर्तन मिले हैं। यह खोज इस बात का पुख्ता प्रमाण हो सकती है कि रायपुर शहर का इतिहास सदियों पुराना है।

सिक्कों पर अंकित हैं हाथी और राजा की आकृतियां

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पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के उप संचालक पी.सी. पारख ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग इन दिनों प्रदेश की नदियों के किनारे नए पुरातात्विक स्थलों की खोज के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत खारुन नदी किनारे रायपुरा विसर्जन कुंड के पास एक निजी भूमि पर यह ऐतिहासिक खजाना मिला। रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

बरामद हुए 60 तांबे के सिक्कों की खास बात यह है कि इनके एक तरफ हाथी और दूसरी तरफ राजा की आकृति बनी हुई है, जो कुषाणकालीन सिक्कों की विशेषता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज रायपुर और छत्तीसगढ़ के इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

निजी प्रोजेक्ट पर लगी रोक, खुदाई की तैयारी

जिस स्थान पर यह महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं, वह एक निजी भूमि है और वहां एक निर्माण प्रोजेक्ट प्रस्तावित था। खोज की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्काल प्रोजेक्ट के काम पर रोक लगा दी है। रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक विवेक आचार्य ने बताया, “नदियों के आसपास सर्वे के दौरान यह महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। चूंकि जगह निजी है, इसलिए वहां व्यवस्थित खुदाई की अनुमति के लिए रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखा गया है।” रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “पुरातत्व विभाग का पत्र मिला है। जमीन पर खुदाई की अनुमति मांगी गई है और वहां चल रहे प्रोजेक्ट पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।” रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

क्या रायपुरा में ही बसा था ‘पुराना रायपुर’?

इस खोज ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के उस दावे को और मजबूत कर दिया है, जिसके अनुसार असली और पुराना रायपुर शहर इसी रायपुरा क्षेत्र में बसा हुआ था। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और पुराना इतिहास कहीं दब गया। अब पहली से तीसरी शताब्दी के इन सिक्कों का मिलना इस बात का एक मजबूत पुरातात्विक प्रमाण है कि यह क्षेत्र सदियों पहले भी एक महत्वपूर्ण बसाहट का केंद्र था। रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

‘विजन 2035’ के तहत हो रहा सर्वे

यह खोज छत्तीसगढ़ सरकार के ‘विजन प्लान 2035’ का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत खारुन, शिवनाथ, जोंक, इंद्रावती और रेणुका जैसी प्रमुख नदियों के किनारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ की प्राचीन और गौरवशाली विरासत को दुनिया के सामने लाया जा सके। रायपुर लिखेगा नया पुरातात्विक इतिहास

Dr. Tarachand Chandrakar

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