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एक जुलाई से IPC नहीं बोलेंगे ‘जनाब’… जानें क्या-क्या बदलने वाला है

एक जुलाई से IPC नहीं बोलेंगे ‘जनाब’… जानें क्या-क्या बदलने वाला है

1 जुलाई से दिल्ली सहित पूरे देश में नए कानूनी बदलावों का आगाज़ हो रहा है, जिसके अनुसार IPC (भारतीय दण्ड संहिता) की जगह BNS (भारतीय न्याय संहिता) का उपयोग होगा। 1 जुलाई से दिल्ली समेत पूरे देश में IPC (भारतीय दण्ड संहिता) के स्थान पर नए कानूनी बदलाव लागू हो रहे हैं। अब पुलिस अधिकारियों को ‘जनाब’ कहने की बजाय BNS (भारतीय न्याय संहिता) का उपयोग करना होगा। इस नए निर्देशिका के अनुसार एफआईआर, सेक्शन, डिजिटल और फोरेंसिक जांच की प्रक्रियाएं भी सुधारी जा रही हैं। IPC को ब्रिटिश काल में 1860 में अंग्रेजों ने लागू किया था, और अब इसे बदलकर नए विशिष्टीकरण के साथ पेश किया जा रहा है। इसके साथ ही एफआईआर, सेक्शन, डिजिटल और फोरेंसिक जांच की प्रक्रियाओं में भी सुधार किया गया है।

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सालभर से पुलिस के जवानों को मिल रही ट्रेनिंग

दिल्ली पुलिस ने अपने जवानों को इन नए कानूनी परिवर्तनों के लिए प्रशिक्षण दिया है, जिसके तहत वे नवीनीकरण की प्रक्रिया को समझ रहे हैं। यह प्रशिक्षण लगभग एक साल से चार अलग-अलग स्थानों पर दिल्ली में प्रदान किया गया है। इसके साथ ही, एक नया मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है जो पुलिस अधिकारियों को बदले हुए कानूनी धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता की स्क्रीन पर सारी जानकारी प्रदान करेगा। यह ऐप 1 जुलाई को लॉन्च किया जाएगा।

इस नए संहिता के आने से सामान्य जनता को भी समझने में आसानी होगी कि उन्हें अपने अधिकारों और पदक्षेपों के बारे में कैसे सोचना चाहिए। यह प्रयास कानूनी सुधार और जनता के अधिकारों को समझाने का भी हिस्सा है।

एक जुलाई से IPC नहीं बोलेंगे 'जनाब', जानें क्या-क्या बदलने वाला है

क्या बदला FIR के फॉर्मेट में

पहले की FIR: FIRST INFORMATION REPORT (धारा 154 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत)

1 जुलाई से FIR: FIRST INFORMATION REPORT (धारा 173 बीएनएनएसएस के अंतर्गत) एफआईआर का बाकी फॉर्मेट उसी तरह का दिखेगा

BNS में अब इन धाराओं से पहचाने जाएंगे ‘सीरियस क्राइम’

रेप और पॉक्सो- बीएनएस 65 और 4 पॉक्सो (कम से 20 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास, जुर्माना)

हत्या- बीएनएस 103 (1) – मृत्युदंड या आजीवन कारावास

मॉब लिंचिंग- बीएनएस 103 (2) – पांच से अधिक लोगों का ग्रुप मिलकर जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा को लेकर हत्याएं करता है, ऐसे ग्रुप के हर एक सदस्य को दोष साबित होने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा।

किडनैपिंग- बीएनएस 137- कम से कम सात साल और इससे अधिक की सजा, जुर्माना भी

फिरौती के लिए किडनैपिंग- बीएनएस 140 (2) मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा

स्नैचिंग- बीएनएस 304 – कम से कम तीन साल की सजा और जुर्माना

दंगा- बीएनएस 189/190/191/192/324/117/57/61/3(5)- कम से कम 7 साल की सजा

दहेज के लिए हत्या- बीएनएस 80 (2) – कम से कम सात साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा

एक्सिडेंट में मौत- बीएनएस 106(2)- अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माना

हत्या की कोशिश- बीएनएस 109- मृत्युदंड या आजीवन कारावास

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Nidar Chhattisgarh Desk

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