
शराब प्रेमियों के साथ बड़ा धोखा:छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी शराब दुकान के भीतर ही मदिरा में मिलावट का काला खेल चल रहा था। जिले के पिथौरा स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान में आबकारी विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) के दौरान एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने दुकान के ही चार कर्मचारियों को शराब की बोतलों में पानी मिलाते हुए रंगे हाथों दबोचा है। शुरुआती जांच में लोकप्रिय ब्रांड ‘मैकडॉवेल नंबर-1’ की बोतलों में मिलावट की पुष्टि हुई है, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र के शराब खरीदारों में हड़कंप मच गया है।
टेबल पर सरेआम चल रहा था मिलावट का खेल, आबकारी टीम ने दी दबिश
मिली जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग की विशेष टीम रुटीन चेकिंग और निरीक्षण के उद्देश्य से पिथौरा की अंग्रेजी शराब दुकान पहुंची थी। जैसे ही टीम ने दुकान के भीतर प्रवेश किया, वहाँ का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। दुकान के कर्मचारी काउंटर के पीछे बेहद बेखौफ होकर शराब की सीलबंद बोतलों को खोल रहे थे और सिरिंज या अन्य माध्यमों से उसमें पानी मिला रहे थे। यह पूरी मिलावटखोरी मैकडॉवेल नंबर-1 के क्वाटर्स (पौवे) में की जा रही थी। अधिकारियों ने बिना वक्त गंवाए चारों आरोपियों को मौके पर ही धर दबोचा और पानी मिली शराब का जखीरा जब्त कर लिया।

सालों से जमे थे कर्मचारी, लंबे समय से चल रहा था यह गोरखधंधा
विभागीय पूछताछ और प्राथमिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। यह अवैध धंधा कोई दो-चार दिन का नहीं, बल्कि पिछले काफी समय से फल-फूल रहा था। पकड़े गए आरोपियों में से:
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उमेश मन्नाडे और करन सोनटके पिछले लगभग दो वर्षों से इसी दुकान में पदस्थ थे।
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नारायण निषाद और हेमंत पटेल बीते 7 से 8 महीनों से यहाँ सेवाएं दे रहे थे।
एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने के कारण इन कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके थे कि इन्हें पकड़े जाने का कोई डर नहीं था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस दुकान की कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार मौखिक शिकायतें आ चुकी थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया।

ग्राहकों की जेब पर डाका और सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़
इस बड़े खुलासे के बाद स्थानीय उपभोक्ताओं और नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि ऊंचे दामों पर शराब खरीदने के बावजूद उन्हें पानी मिला हुआ और दूषित उत्पाद परोसा जा रहा था। यह सीधे तौर पर ग्राहकों के साथ की जा रही वित्तीय धोखाधड़ी तो है ही, साथ ही बिना फिल्टर या दूषित पानी मिलाने से यह लोगों के स्वास्थ्य और लीवर के लिए और भी अधिक जानलेवा साबित हो सकता था।
आबकारी एक्ट की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज
पकड़े गए चारों शातिर कर्मचारियों के खिलाफ आबकारी विभाग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। आरोपियों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 38(क) के तहत आपराधिक मामला पंजीबद्ध कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। आबकारी अधिकारियों का साफ कहना है कि शासकीय राजस्व और उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार ऊपर के किन अधिकारियों या सप्लायरों से जुड़े हुए थे।
विभागीय मॉनिटरिंग और सुपरविजन पर खड़े हुए बड़े सवाल
शराब प्रेमियों के साथ बड़ा धोखा:पिथौरा की इस घटना ने छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली (Internal Monitoring System) की पोल खोलकर रख दी है। जागरूक नागरिकों का सवाल है कि जब महीनों से दुकान के भीतर यह खेल चल रहा था, तो स्थानीय आबकारी निरीक्षकों और सुपरवाइजरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लोगों ने मांग की है कि ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सभी वेंडिंग दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का लाइव फीड सीधे जिला मुख्यालय से जोड़ा जाना चाहिए और लगातार औचक निरीक्षण की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।









