नाबालिग छात्राओं से अनुचित व्यवहार के दोषी शिक्षक को 6 साल की सजा

बलौदाबाजार की विशेष पॉक्सो अदालत ने स्कूल की छात्राओं से अनुचित व्यवहार के मामले में प्रभारी प्राचार्य तिलक राम वर्मा को 6 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
बलौदाबाजार जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने स्कूल की नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार के मामले में शिक्षक तिलक राम वर्मा को दोषी ठहराते हुए 6 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी पलारी थाना क्षेत्र के टीपावन स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में प्रभारी प्राचार्य था।

मामले में कुल 9 छात्राओं से जुड़े आरोप सामने आए थे। सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) गिर्जेश प्रताप सिंह की अदालत में हुई, जबकि अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने पैरवी की।
कैसे सामने आया मामला?
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने एक छात्रा को उसके पिता का हालचाल पूछने के बहाने स्टाफ रूम में बुलाया और वहां अनुचित तरीके से छुआ। घबराई छात्रा वहां से भाग निकली।

इसके बाद स्कूल की एक शिक्षिका ने छात्राओं को “गुड टच और बैड टच” की जानकारी दी और पूछा कि क्या किसी के साथ ऐसी घटना हुई है। इसी दौरान पीड़ित छात्रा ने अपनी आपबीती शिक्षिका और अपनी मां को बताई। फिर अन्य छात्राओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए। कुल 9 छात्राओं से जुड़े आरोप सामने आने पर मामला पुलिस तक पहुंचा।
किन धाराओं में दर्ज हुआ था केस?
पुलिस ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपी के विरुद्ध ये धाराएं लगाई थीं:

- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75(1)
- पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 9(f)
- एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v)(क)
जांच के बाद पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर अदालत में चालान पेश किया।
सुनवाई और अदालत का फैसला
अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए। छात्राओं के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
सजा एक नज़र में:
- BNS की धारा 74 और 75(1): 2 साल का सश्रम कारावास
- पॉक्सो एक्ट की धारा 9(f): 6 साल का सश्रम कारावास और जुर्माना
- कुल मिलाकर अधिकतम सजा: 6 साल का सश्रम कारावास
जुर्माने की राशि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्कूलों के लिए क्या सबक?
इस मामले में बच्चों को “गुड टच-बैड टच” की जानकारी मिलने के बाद ही पीड़ित छात्रा ने खुलकर बात की। यह दिखाता है कि बच्चों को शारीरिक सुरक्षा की समझ देना और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनना कितना जरूरी है। अभिभावक भी बच्चों से नियमित बातचीत कर उन्हें भरोसा दे सकते हैं कि वे किसी भी असहज स्थिति के बारे में बेझिझक बता सकें।
आगे क्या?
फैसले के खिलाफ आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का कानूनी विकल्प होता है। फिलहाल अपील को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।









