
दुर्ग की सुपेला पुलिस ने AI से बनी युवतियों की तस्वीरों के जरिए शादी के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी मैरिज ब्यूरो का खुलासा किया, 24 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार।
दुर्ग जिले की सुपेला पुलिस ने शादी कराने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक फर्जी मैरिज ब्यूरो का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय परमानंद यादव सोशल मीडिया पर AI से तैयार काल्पनिक युवतियों की तस्वीरें इस्तेमाल कर विवाह के इच्छुक लोगों को जाल में फंसाता था। उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

कार्रवाई 29 अक्टूबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर की गई। मौके से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नकदी और कंप्यूटर सहित कुल ₹2,83,600 की संपत्ति जब्त की गई है।
तीन नामों से चल रहा था फर्जी मैरिज ब्यूरो
पुलिस के मुताबिक, आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर तीन नामों से मैरिज ब्यूरो चला रहा था:

- कल्याण मैट्रिमोनी
- एलिट मैच मैट्रिमोनी
- फ्यूचर पार्टनर
इन पेजों पर AI से बनी काल्पनिक लड़कियों की तस्वीरें और फर्जी मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर विज्ञापन चलाए जाते थे। विवाह के इच्छुक लोग संपर्क कर अपना बायोडाटा भेजते थे, जिसके बाद पसंद की लड़की से शादी कराने का भरोसा देकर पैसे जमा कराए जाते थे।
₹2,000 से शुरू होती थी ठगी
प्रारंभिक जांच के अनुसार, “मैरिज काउंसलर” के नाम पर इस्तेमाल हो रहे बैंक खातों के QR कोड से लोगों से शुरुआत में ₹2,000 और अन्य राशि जमा कराई जाती थी। पैसे मिलते ही संबंधित व्यक्ति का नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता था और संपर्क बंद हो जाता था। पुलिस ने जांच में पाया कि इन खातों के खिलाफ भारत सरकार के समन्वय पोर्टल पर शिकायतें भी दर्ज हैं।

मुखबिर की सूचना पर कैसे हुई कार्रवाई?
29 अक्टूबर को सुपेला पुलिस को सूचना मिली कि उत्तर गंगोत्री भवन में यूनियन बैंक के पास एक परिसर के हॉल में फर्जी मैरिज ब्यूरो चल रहा है। पुलिस ने गवाहों के साथ दबिश दी तो वहां संचालक परमानंद यादव और चार युवतियां काम करती मिलीं।
तलाशी में ये चीजें मिलीं:
- कंप्यूटर और इंटरनेट वाई-फाई उपकरण
- मोबाइल फोन और सिम कार्ड
- अलग-अलग बैंक खातों की चेकबुक और QR कोड
- प्रचार के फ्लेक्स
- ग्राहकों के मोबाइल नंबर और भुगतान की जानकारी वाले रजिस्टर
नौकरी के बहाने बुलाई गईं युवतियां
पूछताछ में युवतियों ने बताया कि उन्हें अच्छी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया था। हर महीने ₹7,000 वेतन का आश्वासन दिया गया और दो दिन की ट्रेनिंग के बाद उन्हें ग्राहकों से बात करने और QR कोड से भुगतान लेने का काम सौंपा गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी करीब तीन महीने से यह गतिविधि चला रहा था और रोजाना लगभग 20 से 50 कॉल किए-लिए जाते थे।
क्या-क्या हुआ जब्त?
| सामग्री | विवरण | अनुमानित कीमत |
|---|---|---|
| नकद | ₹1,64,000 | ₹1,64,000 |
| मोबाइल फोन | 22 कीपैड और 4 एंड्रॉयड | ₹78,000 |
| सिम कार्ड | एयरटेल और वीआई के 16 | ₹1,600 |
| इलेक्ट्रॉनिक उपकरण | 1 कंप्यूटर सेट, वाई-फाई उपकरण | ₹40,000 |
| बैंक दस्तावेज | बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, फेडरल बैंक, SBI, IDBI सहित अन्य की चेकबुक और एक पासबुक | — |
कुल जब्त संपत्ति ₹2,83,600 की बताई गई है।
आरोपी पर कौन-सी धाराएं लगीं?
पुलिस ने थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 1630/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 319(2) में मामला दर्ज किया है। आरोपी परमानंद यादव मूल रूप से अहिवारा थाना क्षेत्र के ग्राम ओटेबंद का रहने वाला है और फिलहाल नेहरू नगर ईस्ट में रह रहा था।
ऐसी ठगी से कैसे बचें?
दुर्ग पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है:
- रजिस्ट्रेशन या प्रोफाइल फीस देने से पहले संस्था की सत्यता जांचें
- सोशल मीडिया की तस्वीरों पर आंख बंद कर भरोसा न करें, AI से बने फर्जी प्रोफाइल से सावधान रहें
- अनजान व्यक्ति को आधार, बैंक विवरण, OTP या पासवर्ड न दें
- कमीशन या नौकरी के लालच में अपना बैंक खाता, सिम या QR कोड किसी को इस्तेमाल न करने दें, इससे कानूनी परेशानी हो सकती है
- ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
आगे क्या?
आरोपी न्यायिक रिमांड पर है। पुलिस ने ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या या कुल ठगी की रकम की जानकारी अभी साझा नहीं की है। खातों की जांच जारी रहने की स्थिति में आगे और खुलासे संभव हैं, लेकिन इस बारे में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।









