LIVE UPDATE
कानून

यह जरूरी नहीं हमेशा पुरुष ही गलत हो… महिला यौन उत्पीड़न केस में इलाहाबाद HC की बड़ी टिप्‍पणी

यह जरूरी नहीं हमेशा पुरुष ही गलत हो… महिला यौन उत्पीड़न केस में इलाहाबाद HC की बड़ी टिप्‍पणी

NCG News desk Allahabad:-

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

इलाहाबादl सेशन कोर्ट ने रेप के आरोपी को बरी कर दिया था। महिला ने कोर्ट के इस फैसले को इलाहाबाद HC में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। महिला ने आरोप लगाया है कि व्‍यक्ति ने शादी का वादा करके उससे सालों शारीरिक संबंध बनाए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में कानून महिलाओं का पक्ष लेता है, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं हमेशा पुरुष ही गलत होl हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। मामले में महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झांसा देकर सालों तक रेप करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों का आकलन करना हमेशा बेहद अहम होता है। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपी की ही नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की भी है।

यह जरूरी नहीं हमेशा पुरुष ही गलत हो... महिला यौन उत्पीड़न केस में इलाहाबाद HC की बड़ी टिप्‍पणी

हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी को बरी करने के सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। इस मामले में महिला ने आरोपी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में भी मामला दर्ज कराया था। महिला ने साल 2019 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने उससे शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए। बाद में वह अपने वादे से मुकर गया। यही नहीं, उसने पीड़ित महिला की जाति को लेकर भी अपमानजनक बातें कहीं। इस मामले में आरोपी के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को रेप के आरोपों से बरी कर दिया था और सिर्फ आईपीसी की धारा 323 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद महिला हाई कोर्ट पहुंची थी।

महिला है पहले से विवाहित, ऐसे मे

इस मामले में आरोपी व्यक्ति ने हाई कोर्ट से बताया कि महिला के साथ उसके संबंध सहमति से थे। कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि महिला ने साल 2010 में शादी की थी लेकिन 2 साल बाद ही वह अपने पति से अलग हो गई थी। हालांकि, दोनों का तलाक नहीं हुआ था। ऐसे में कोर्ट ने अहम टिप्पणी की और कहा कि परिस्थितियों के मुताबिक इस बात की संभावना कम है कि आरोपी ने महिला को शादी के झूठे वादे में फंसाया हो। दूसरी बात यह कि महिला पहले से ही विवाहित थी और उसका विवाह अब भी कानून की नजर में मौजूद है। ऐसे में शादी का वादा करने का आरोप अपने आप खत्म हो जाता है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

ये भी पढ़े:- 

 

 

Nidar Chhattisgarh Desk

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है। हमारी यह साइट 24 घंटे अपडेट होती है, जिससे हर बड़ी घटना तत्काल पाठकों तक पहुंच सके। पाठक भी अपनी रचनाये या आस-पास घटित घटनाये अथवा अन्य प्रकाशन योग्य सामग्री ईमेल पर भेज सकते है, जिन्हें तत्काल प्रकाशित किया जायेगा !

Related Articles

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE